2019 Happy Holi Shayaris, Essay, Wishes, Images & Holi History in Hindi

2019 Happy Holi

होली का त्योहार

होली रंगों का त्यौहार है जो आम तौर पर मार्च में पूर्णिमा को आता है ।। यह प्यार और एकता का भी त्योहार है और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाता है। यह त्योहार उत्तर भारत में बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

होली को जीवंत रंगों के साथ मनाया जाता है – ये रंग वास्तव में खुशी के रंग, प्यार के रंग और उत्साह का रंग हैं जो, हमारे जीवन को हमारे दिलों के मूल में खुशियों से भर देते हैं। यह प्रत्येक के जीवन को उसके विभिन्न गुणों से सुशोभित करता है।

होली का इतिहास

होलीका

होली का इतिहास बहुत पौराणिक है, इसके आरंभ का जिक्र विष्णु पुराण मे लिखित रुप मे पाया जाता है| मगरकिन्वदन्तिओ के रुप मे यह पुराणो से भी पहले से कहा और सुना जाता रहा है| यानी कहा जाय तो होली पुरावैदिक काल से ही मनाई जाती है, जब से आर्यो ने खेती करने का हुनर सीखा और बंजारा जीवन छोड़ एक जगह बसने लगे तब से होली को धार्मिक परंपरा से जोड़ दिया गया और यह और भी लोकप्रिय हो गया। अब सवाल यह है की जब यह इतना पुराना त्यौहार है, तो कोई लिखित जानकारी क्यों नहीं। ऐसा है!… की ऋग्वेद की पूरावैदिक काल में कोई जानकारी आज भी उपलब्ध नहीं है। बाद में वेदव्यास ने वैदिक काल में इनके श्लोकों को पंक्तिबद्ध किया और काव्य की रचना की जिसे ऋग्वेद कहा गया। ऋग्वेद की रचना भी वैदिक काल में ही की गई मगर इसके श्लोकों को पूरावैदिक काल में भी उच्चारित किया जाता रहा था मगर. लिखित रूप में कोई जानकारी नहीं थी।

उस समय हिन्दू धर्म नहीं था। मात्र सनातन धर्म का ही नाम था। वेदों के बाद पुराणों की रचना की गई। पुराणों में विष्णु पूराण में और दशावतार में नरसिम्हा अवतार में होली का जिक्र मिलता है। वास्तव में यह एक फसल की कटाई का त्यौहार है। खाश कर गेहूं की फसल की कटाई का। वेदव्यास ने जब इसे धर्म से जोड़ा तो लोगों में उमंग और उल्लाश फ़ैल गया। किन्वदन्तिओ के अनुशार जब हिरण्यकश्यप ने ईश्वर के अस्तित्व को नकारना शुरू कर दिया और खुद को भगवान घोषित कर दिया तो सारी प्रजा में यह बात फ़ैल गई।

हिरण्यकश्यप बड़ा ही प्रतापी राजा था, मगर उसके प्रताप ने उसे घमंडी बना दिया था। देवताओं  ने भी देखा की अगर इसका प्रताप ज्यादा फैलेगा तो ईश्वर का नाम फिर धरती पर या देव लोक में कौन लेगा? ऐसे में उसका घमंड तोड़ने के लिए भगवान ने प्रह्ललाद का जन्म हिरण्यकश्यप के घर में दिया। प्रह्ललाद की माता अब भी भगवान विष्णु की ही आराधना कर रही थी। मगर अपने पति के डर से कुछ नहीं बोलती। प्रह्ललाद को भी उसने भगवान विष्णु की आराधना का संस्कार दिया। प्रह्ललाद भी भगवान विष्णु की आराधना करने लगा, यह बात जब हिरण्यकश्यप के कानो तक पहुंची तो वह आग बबूला हो उठा। जिस राज्य में प्रजा उसे भगवान मान रही थी, उसी राज्य के राजा का पुत्र विष्णु की आराधना करे? यह कैसे हो सकता था।

उसने प्रह्ललाद को पहले समझने की कोशिश की मगर परह्लाद का एक ही कहना था की घट घट में बसने वाले भगवान के अस्तित्व को नाकारा नहीं जा सकता इसलिए चाहे जो हो वह एक ही मंत्र का उच्चारण करेगा नमो भगवते बसहुदेवय नमः इस बात को सुन हिरण्य और भी आग बबूला हुआ। ऐसी औलाद पाने से अच्छा तो निरवंश ही रहना उससे बेहतर है। प्रह्ललाद को उसने पहले पहाड़ से धकेल कर मरना चाहा मगर वह बच निकला, उसके बाद हाथी के पैरों तले कुचलवाना चाहा उसमे भी वह बच निकला। अंत में उसने उसे आग के हवाले करना चाहा मगर, उसे प्रह्ललाद के फिर बच निकलने का डर था। तब उसने अपनी बहन होलिका को बुलाया जिसको ये आशीर्वाद था कि उसे अग्नि जला नहीं सकती। चिता सजाई गई तय हुआ की प्रह्ललाद को उसकी बुआ चिता पर लेकर बैठेगी और प्रह्ललाद जल मरेगा , होलिका बच निकलेगी। ईश्वर को यह कुछ ज्यादा ही क्रूर और अत्याचार महसूस हुआ। अतः प्रह्ललाद जल नहीं पाया बल्कि होलिका ही जल मरी। दूसरे दिन लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई और होलिका के चिता की रख से लोगों ने होली खेली।

इसके पीछे एक ही कारन था की दुःख, बिषाद, तकलीफ हमेशा के लिए किसीकी ज़िन्दगी में नहीं रहता न रहेगा। यह दुनियाँ परिवर्तनशील है। रात और दिन, सुख और दुःख, हर्ष और बिषाद जीवन रूपी गाड़ी के दो पहिये है, जो हमेशा साथ-साथ चलते हैं। यह चक्र निरंतर चलता रहता है। इस से छुटकारा नहीं है। फिर लोगों का जीवन कैसा हो? यह बहुत ही अहम् प्रश्न था। ऋषियों ने तब बताया की समय अगर बुरा है तो धैर्य रखो और उस वक्त ईश्वर का ध्यान करो, भला समय है तो भी ज्यादा खुश होने की आव्यशकता नहीं, उस वक्त को भी लोगों के साथ बाँट कर चलो। इस से वक्त एक समान बीतेगा और अंत समय में शरीर छोड़ने में मोह माया सामने नहीं आएगी।

Happy Holi Shayaris

होली त्योहार है रंग और भांग का,
हम सब यारों का,
घर में आए मेहमआनो का,
गली में गली वालों का,
मोहल्ले में माहौल वालो का,
देश में देशवालो का….!!!
बूरा ना मानो होली है होली है भाई होली है…!

Holi Wishes Images

स्नेह के रंग दो दुनिया सारी,
प्यार के रंग से भरो पिचकारी,
ये रंग ना जाने कोई बोली,
आपको मुबारक हो होली.
रंगो के त्योहार मे
सभी रंगो की हो भरमार
ढेर सारी खुशियो से भरा हो आपका संसार
यही दुआ है हमारी हर बार

Holi Wishes Images

रंगों के त्योहार में,
सभी रंगों की हो भरमार.
ढेर सारी खुशियों से,
भरा हो आपका संसार.
यही दुआ है हमारी हर बार. . .

Holi Wishes Images

दिलो को मिलाने का मौसम है,
दूरियाँ को मिटाने का मौसम है,
होली का त्योहार ही ऐसा है,
रंगो मे डूब जाने का मौसम है..
Happy Holi. . . !!!

Happy Holi Shayaris

 

 

pauranik holi

पौराणिक होली

पौराणिक जमाने में भी रंगीन होली होती थी। रंगों के प्रति आकर्षण तो आदि मानव के लेखिन और चित्रकारियों में भी मिलता है। जहाँ प्रकृति से मिले रंगों का प्रयोग किया जाता था। जिसकी चमक आज भी कन्द्रों में पुरातत्व विभाग को मिलती है। जिसका रंग अभी तक फीका नहीं पड़ा है। पत्तियों और फूलों की पंखुड़ियों से निकले रंगों का प्रयोग लोग उस समय करते थे खास कर पलाश के फूल से निकले बसंती रंगों का। जिसे लगाने पर कोई हानी नहीं होती थी। उस समय के भाईचारे को बनाये रखने के लिए होली एक उत्तम अवसर साबित हुआ। लोग सारी दुश्मनी भूल कर गले लग जाते। वैसे भी देखा जाये तो अगर किसी दुःख और तकलीफ को भूलना हो, तो एक नया अवसर लाओ जो महत्वपूर्ण हो तो लोग सारे दुःख भूल कर सारा ध्यान उस तात्कालिक घटना पर केंद्रित कर देते है। पिछले दुःख पीछे ही छूट जाता है। हमारे दार्शनिक इस बात को जानते थे तभी उन्होंने पर्व और त्योहारों का चलन शुरू किया।

 

बरसाने की होली

बरसाने की होली

बरसाने की होली हमें आज भी याद दिलाती है की द्वापर युग की होली कैसी थी और कृष्णा के साथ गोपीयाँ कैसी होली मानती थी। बरसाने की होली स्त्री पुरुष के संबंधों को दर्शाती है। फागुन के महीने में मन मचल जाता है देवर और भाभी के संबंधों में मिठास भर जाती है। बुढ़ापा भी जवानी के सर चढ़ कर बोलने लगती है। बच्चे, नौजवान और  बूढ़े सभी ढाल लेकर भाभीओं के लठमार होली खेलते है। आश्चर्य होता है, आखिर स्त्रीयाँ पुरुषों पर लाठीयाँ क्यों बरसाती है। यह इस बात का द्योतक है की सम्बन्ध की भी सीमा होती है स्त्री पुरुष एक दूसरे के द्योतक हैं मगर सीमा की लकीर और मर्यादा के अंदर। होली या छूट के नाम पर सब जायज नहीं हो सकता। उसकी भी अपनी सीमाएं हैं जिसकी समाज को जरूरत है। समरसता बनाये रखने के लिए। कहा जाता है कृष्णा और राधा का प्यार बहुत ही गहरा और निश्छल था, उन्होंने बचपन साथ गुजरे लेकिन जवानी नहीं गुज़ार पाए। जब भी होली आती थी कृष्णा राधा को जरूर याद करते थे। क्योंकि यह उनका निश्छल प्रेम था। प्यार कभी भी समझौते से नहीं होता, ना ही किसी प्रकार का बलिदान मांगता है।

 

बंगाल की होली

बंगाल की होली

बंगाल में भी होली बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। मगर इसमे एक खास बात यह होती है की यह हमारी होली से एक दिन पहले मनाई जाती है। वैसे बंगाल की परंपरा भी हिंदू रीति रिवाज़ से मिलते जुलते हैं जो, सनातन धर्म की परंपरा से ही उत्पन्न हुई है, मगर इनके पंजी यानी पांचांग मे कहा गया है की जिस दिन होलिका जाली थी यानी फाल्गुन माह के पूर्णिमा को वही असली होली है। तब सवाल यह उठता है की इनके पांचांग मे होलिका जलाने का क्या निर्देश दिया गया है? पंजी के अनुसार होलिका दहन के एक दिन पहले ही बंगाल मे होलिका दहन कर ली जाती है ओर दूसरे दीन होली मनाई जाती है . जिसे यहाँ के लोग होली को डोल के नाम से जानते हैं, बड़ी अज़ीब है मगर सत्य है की एक ही संप्रदाय के होने के बावज़ूद त्योहार मानने की परंपरा मे अंतर होता है. यह एक खोज का विषय है. शायद बंगाल की संस्कृति और परंपरा किंचित ब्राम्‍हणों ने कालांतर मे अपनी पहचान बनाने के लिए बदल दिया हो. वैसे भी बंगाल को हमारे देश का बुद्धिजीविओ का गढ़ कहा जाता रहा है. मामला कुछ भी हो बाकी की परंपरा ठीक हमारे ही जैसा होता है. मगर एक बात है यहाँ बहुत ही शालीनता से होली मनाई जाती ही.जो एक अलग पहचान रखती है. जिसमे सिर्फ़ और सिर्फ़ रंगों का ही महत्व होता है.

 

बिहार और उत्तर प्रदेश की होली

बिहार और उत्तर प्रदेश की होली

हम बिहार और उत्तर प्रदेश मे यह मानते हैं की जिस दिन होलिका जाली उसके दूसरे दिन से नया साल का सुभारंभ होता है. चैत का महीना जो हमारे सनातन कलेंडर मे जिसका महत्व चाँद के हिसाब से यानी उसकी कला से लगाया जाता है. होली हम तो चैत के पहले दिन मानते हैं मगर बंगाल मे फाल्गुन माह के पूर्णिमा के यानी माह के अंतिम दिन ही माना कर समाप्त कर दिया जाता है. बिहार और  उत्तर प्रदेश मे साल के पहले दिन को मानते हुए पूरे माह घरों मे ओर सार्वजनिक जगहों पर यानी मंदिरों ओर पेड़ के चबूतरे पर चैइता का आयोजन किया जाता है. इस बात का ज़िक्र महान साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु ने अपने सहित्य मे भी किया है, जिस पर राज कपूर ने तीसरी कसम नमक फिल्म भी बनाई. जिसकी सारी शूटिंग पूर्णिया में की गई है. उसमे एक गाना है ,” चलत मुशफिर मो लिया रे पिंजरे वाली मुनिया,” यह वास्तव मे चैइता का ही एक रूप है जिसमे वहीदा रहमान ने एक नर्तकी की भूमिका निभाई है. इन जगहों पर होली मे भांग से बने पेय और मिठाइयों को भी महत्व दिया जाता है. माना जाता है की जब तक धुन के पक्के नहीं होंगे गाना बजाना भी अधूरा रह जाएगा. सो लोग इस समय भांग की बरफी , जलेबी, ओर अन्य मिठाइयों ही छोड़ दिया जाए तो सही रहेगा. मगर कुल मिलकर देखा जाए तो होली मस्ती भरा और जीवन मे जोश भरने का त्योहार है. जिसे सदियों से लोग इसी रूप मे मानते चले आ रहे है और शायद थोड़े बदले हुए स्वरूप मे ही सही यह परंपरा युग बदलने तक जब तक मानव सभ्यता चलती रहेगी, यों ही होली का त्योहार मनाया जाता रहेगा…

 

Holi Wishes in Hindi

होली दोस्ती के बंधन को मजबूत करने
और इसमें और अधिक रंग जोड़ने का दिन है।
त्योहार का पूरा आनंद लें. . . !
होली की शुभकामनाएँ. . . !

Holi Wishes Images

होली के शुभ अवसर पर आप के लिए एक छोटी सी कामना।
आप हमेशा स्वस्थ, संतुष्ट और खुश रहें।
आपको और आपके परिवार को होली की शुभकामनाएं।

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हम आपके स्वास्थ्य, समृद्धि और व्यावसायिक उपलब्धियों की कामना करते हैं।
आपको और आपके परिवार को होली की अनेकों शुभकामनाएँ

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आपका जीवन होली के रंगों की तरह रंगीन हो।
आप जीवन में नई ऊंचाइयों पर पहुँचे.
आपको होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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आपका जीवन खुशियों, उल्लास, मस्ती
और हँसी के रंगों से रंगा रहे. . .!!!

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होली का रंगीन त्योहार आपके जीवन में सौभाग्य और समृद्धि लाए।
आपको और आपके पूरे परिवार को होली की ढेरों शुभकामनाएँ।

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रंग जीवन में बहुत आनंद और उल्लास लाते हैं।
आपको होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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होली कैसे मानते हैं

इस अवसर के लिए कई मिठाइयां और अन्य स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं। लोग सुबह से ही अपने घरों से बाहर निकलने लगते हैं। वे अपने हाथों में रंगों के थैलियाँ ले जाते हैं और सभी के चेहरे पर सूखे पाउडर को लगाते हैं। मध्य सुबह तक, सभी चेहरे इतने चमकीले रंग के होते हैं कि करीबी दोस्तों को भी पहचानना मुश्किल होता है। 

 

हानिकारक रंगों से बचें

हमें हानिकारक रंगों और रासायनिक रंगों से बचना चाहिए, जो हमारी त्वचा के लिए हानिकारक हो सकते हैं। हमें इस रंगों से सुरक्षित रहना चाहिए और अन्य को यह भी सिखाना है कि, बाजार से रासायनिक रंगों को न खरीदें, केवल पर्यावरण के अनुकूल रंग खरीदें, जिससे हमारी त्वचा को नुकसान हो और सुरक्षा मिलेगी। 

 

होली की बुराई और समाधान

बुराई

कुछ लोगों के लिए होली कुछ अलग ही मायने रखती है। फूहड़पन, नशा, गंदी ओर भद्दी गलियों से भरे गाने और महिलाओं के प्रति अलग ही भाव रखने वाली होती है। शायद आने वाली पीढ़ी के लिए हम यही धरोहर के रूप मे दे पाएँगे। भारत की सांस्कृतिक धरोहर जो, पूरे संसार में एक मायने रखता है। जो आज धूमिल सा होने लगा है। कुछ लोग लज़्ज़ा ओर हया को भूल चुके हैं। होली के त्यौहार में, बहुत से लोग बुरे होते हैं, उनके पास तरीका नहीं होता है। वे इस तरह से नशे में होली मनाते हैं, जैसे वे इस अवसर पर शराब पीते हैं। वे भद्दे व्यवहार करते हैं और अस्वच्छ और बुरे रंगों का प्रयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। 

समाधान

समाधान अगर चाहते हैं तो अपने आने वाले पीढ़ी को इसकी शिक्षा बचपन से ही देनी होगी। आधुनिकता के इस युग मे अपने परंपरा को बचाने की ज़िम्मेदारी अब खुद को उठानी होगी। अच्छे संस्कार का बीज़ारोपण खुद ही करना होगा । यह तभी होगा जब हमारे अंदर नैतिकता का संचार होगा। अन्यथा इन परंपरा को अब तक जो संसार के मात्रा 3% हिंदू मानते चले आ रहे है वह समाप्ति के कगार पर चला आएगा। यह इसलिए कह रहा हूँ की अब ऐसे लोग देश से उपेक्षित होना चाहिए और ऐसा कभी नहीं होना चाहिए।

 

होली क्यूँ मनाया जाता है

उत्सव मानाने का उधेश्य  यह था की ऊंच नीच का भेदभाव छोड़ कर लोग मिलकर सामाजिक ढांचे को बनाये रखे। १२ संस्कार और जीवन के १६ कलाओं को बनाये रख कर देवत्व को प्राप्त कर सके। मगर अब यह मात्र सांकेतिक रह गया है। होली वास्तव में एह्शाश और उल्लाश का त्यौहार है। 

 

होली से क्या शिक्षा मिलती है

होली हमें अपने बड़ों के प्रति सम्मान और छोटों के प्रति प्यार की भावना सिखाती है। जाती-पाती और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठ कर इंसानियत की भाषा सिखाती है। यह तो प्रेम का सन्देश देता है। यानी एक इंसान का इंसान से कैसा नाता हो? भावना कैसी हो? उनके प्रति व्यवहार कैसा हो यह होली से बेहतर कोई नहीं सिखाता।

 

निष्कर्ष एवं परामर्श 

होली के दौरान, लोग अपने पुराने दुश्मनों को भी माफ कर देते हैं और दोस्त बनाते हैं। हर कोई इस त्योहार का आनंद लेता है, चाहे वह युवा हो या वृद्ध। लेकिन हमें केवल अच्छी गुणवत्ता वाले रंगों के साथ खेलने के लिए सावधान रहना चाहिए और किसी को चोट नहीं पहुंचानी चाहिए। इस तरह इस त्योहार में सभी के पास अच्छा समय होगा।हमें सभ्य तरीके से होली मनानी चाहिए। हमें महसूस करना चाहिए कि यह खुशी और दोस्ती का त्योहार है। हमें अपना आनंद दूसरों के साथ साझा करना चाहिए। हमें बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए। त्योहार की वास्तविक भावना को बनाए रखा जाना चाहिए।                                      

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